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विस्तृत कथा — उद्धव जी के हृदय में भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण जब विदुर जी अपनी तीर्थयात्रा के दौरान महान भक्त उद्धव जी से मिले, तब उनके हृदय में भगवान श्रीकृष्ण के विषय में जानने की तीव्र इच्छा थी। विदुर जी जानते थे कि उद्धव केवल कृष्ण के भक्त ही नहीं थे, बल्कि भगवान के अत्यंत निकट सेवक और प्रिय पार्षद थे। इसलिए उन्होंने उद्धव जी से कृष्ण की लीलाओं और उनके संदेशों के विषय में बताने का निवेदन किया। लेकिन जैसे ही विदुर जी ने कृष्ण का विषय उठाया, उद्धव जी तुरंत उत्तर नहीं दे सके। भगवान का स्मरण इतना प्रबल हुआ कि वे बाहरी संसार को लगभग भूल गए। उनका शरीर स्थिर हो गया, वे मौन हो गए और भगवान के चरणकमलों के ध्यान में डूब गए। उनकी आँखों से विरह के आँसू बहने लगे। विदुर जी ने उनके शरीर में भक्ति के दिव्य लक्षण देखकर समझ लिया कि उद्धव जी का कृष्ण से संबंध केवल ज्ञान या श्रद्धा का नहीं, बल्कि अत्यंत गहरे प्रेम का था। बचपन से ही कृष्ण की सेवा उद्धव जी की भक्ति वृद्धावस्था में विकसित नहीं हुई थी। जब वे केवल पाँच वर्ष के थे, तभी से भगवान की सेवा में लीन रहते थे। वे कृष्ण की मूर्ति बनाकर उनकी सेवा औ...